Monday, October 2, 2017

थमें रास्ते

गुज़र जाते हैं खूबसूरत लम्हें,
यूँ ही मुसाफिरों की तरह।
यादें वहीं खड़ी रह जाती हैं,
थमें रास्तों की तरह!

तुम

चाहत बन गये हो या,
आदत बन गये हो तुम!
हर सांस में यूँ आते जाते हो,
जैसे इबादत बन गये हो तुम!

मालूम

ज़िन्दगी में हर चीज मालूम हो,
ये जरुरी तो नहीं,
देखो ना...
तुम साँसों में रहोगे ये मालूम है,
साँसें कब तक चलेंगी ये मालूम नहीं!

तुम मिले और

“हमें कहाँ मालूम था, कि इश्क़ होता क्या है?
बस एक ‘तुम’ मिले और ज़िन्दगी, मुहब्बत बन गई!

फासला

फ़ासला भी ज़रूरी था,
चिराग़ रौशन करते वक़्त!
पर ये तजुर्बा हासिल हुआ,
हाथ के जल जाने के बाद.!!

Saturday, September 30, 2017

इतने राम

किस रावण की काटूंँ बाहें,
किस लंका को आग लगाऊँ!
घर घर रावण, पग पग लंका, 
इतने राम कहाँ से लाऊँ!!

Monday, September 25, 2017

शायरी की जुबांँ

जमने दो आज शाम ए महफ़िल,
चलो आज शायरी की जुबां मे बहते हैं.

तुम उठा लाओ ग़ालिब की किताब,
हम अपना *हाल-ए-दिल* कहते हैं !

Sunday, September 24, 2017

शाम

कोई शाम आती है, तुम्हारी याद लेकर,
कोई शाम आती है, तुम्हारी याद देकर.
हमे तो इंतजार है, उस शाम का,
जो आये तुम्हे साथ लेकर!

Saturday, September 9, 2017

गुनाह है

"ख्वाबों का रंगीन होना गुनाह है..
इंसान का जहीन होना गुनाह है..

कायरता समझते हैं लोग मधुरता को..
जुबान का शालीन होना गुनाह है..

खुद की ही लग जाती है नजर..
हसरतों का हसीन होना गुनाह है..

लोग इस्तेमाल करते हैं नमक की तरह..
आंसुओं का नमकीन होना गुनाह है..

दुश्मनी हो जाती है मुफ्त में सैंकड़ों से..
इंसान का बेहतरीन होना गुनाह है.."

Friday, September 1, 2017

तेरी याद ही सही

दिलशाद अगर नहीं तो नाशाद सही, 
लब पर नग़मा नहीं तो फ़रियाद सही।
हमसे दामन छुडा़ के जाने वाले,
जा- जा गर तू नहीं तेरी याद सही!