गुज़र जाते हैं खूबसूरत लम्हें,
यूँ ही मुसाफिरों की तरह।
यादें वहीं खड़ी रह जाती हैं,
थमें रास्तों की तरह!
आशु तो कुछ भी नहीं आसूँ के सिवा, जाने क्यों लोग इसे पलकों पे बैठा लेते हैं।
गुज़र जाते हैं खूबसूरत लम्हें,
यूँ ही मुसाफिरों की तरह।
यादें वहीं खड़ी रह जाती हैं,
थमें रास्तों की तरह!
ज़िन्दगी में हर चीज मालूम हो,
ये जरुरी तो नहीं,
देखो ना...
तुम साँसों में रहोगे ये मालूम है,
साँसें कब तक चलेंगी ये मालूम नहीं!
“हमें कहाँ मालूम था, कि इश्क़ होता क्या है?
बस एक ‘तुम’ मिले और ज़िन्दगी, मुहब्बत बन गई!
फ़ासला भी ज़रूरी था,
चिराग़ रौशन करते वक़्त!
पर ये तजुर्बा हासिल हुआ,
हाथ के जल जाने के बाद.!!
किस रावण की काटूंँ बाहें,
किस लंका को आग लगाऊँ!
घर घर रावण, पग पग लंका,
इतने राम कहाँ से लाऊँ!!
जमने दो आज शाम ए महफ़िल,
चलो आज शायरी की जुबां मे बहते हैं.
तुम उठा लाओ ग़ालिब की किताब,
हम अपना *हाल-ए-दिल* कहते हैं !
कोई शाम आती है, तुम्हारी याद लेकर,
कोई शाम आती है, तुम्हारी याद देकर.
हमे तो इंतजार है, उस शाम का,
जो आये तुम्हे साथ लेकर!
"ख्वाबों का रंगीन होना गुनाह है..
इंसान का जहीन होना गुनाह है..
कायरता समझते हैं लोग मधुरता को..
जुबान का शालीन होना गुनाह है..
खुद की ही लग जाती है नजर..
हसरतों का हसीन होना गुनाह है..
लोग इस्तेमाल करते हैं नमक की तरह..
आंसुओं का नमकीन होना गुनाह है..
दुश्मनी हो जाती है मुफ्त में सैंकड़ों से..
इंसान का बेहतरीन होना गुनाह है.."
दिलशाद अगर नहीं तो नाशाद सही,
लब पर नग़मा नहीं तो फ़रियाद सही।
हमसे दामन छुडा़ के जाने वाले,
जा- जा गर तू नहीं तेरी याद सही!