Thursday, April 22, 2021

जरूरी तो नहीं


हर इक रिश्ते का कोई नाम हो ज़रूरी तो नहीं
दवा के बाद लाजमन आराम हो ज़रूरी तो नहीं।

कभी यूं भी तो बुला सकता हूं मिलने तुझको
हमेशा मुझ को कोई काम हो ज़रूरी तो नहीं।

वजहें तो और भी हो सकती हैं बहकने की
फकत शराब ही बदनाम हो ज़रूरी तो नहीं।

कभी हालात भी बन सकते हैं नफरत का सबब
यहां सनम पे ही इल्ज़ाम हो ज़रूरी तो नहीं।

दिल है रोने का तो तो लीजिए झिझक कैसी
कैफियत एक सी हर शाम हो ज़रूरी तो नहीं।

' ऐ दोस्त ' खुदा की ज़ात से कभी मायूस ना हो
के यूं ही ज़िन्दगी तमाम हो ज़रूरी तो नहीं।

Monday, April 19, 2021

ग़म से पत्थर हो गया लेकिन कभी रोया नहीं

जानता हूं एक ऐसे शख़्स को मैं भी 'मुनीर'
ग़म से पत्थर हो गया लेकिन कभी रोया नहीं


किसी को अपने अमल का हिसाब क्या देते
सवाल सारे ग़लत थे जवाब क्या देते

ख़्वाब होते हैं देखने के लिए
उन में जा कर मगर रहा न करो


अब कौन मुंतज़िर है हमारे लिए वहां
शाम आ गई है लौट के घर जाएं हम तो क्या

ग़म की बारिश ने भी तेरे नक़्श को धोया नहीं
तू ने मुझ को खो दिया मैं ने तुझे खोया नहीं


मोहब्बत अब नहीं होगी ये कुछ दिन बाद में होगी
गुज़र जाएंगे जब ये दिन ये उन की याद में होगी

कल मैं ने उस को देखा तो देखा नहीं गया
मुझ से बिछड़ के वो भी बहुत ग़म से चूर था


वक़्त किस तेज़ी से गुज़रा रोज़-मर्रा में 'मुनीर'
आज कल होता गया और दिन हवा होते गए

तुम मेरे लिए इतने परेशान से क्यूं हो
मैं डूब भी जाता तो कहीं और उभरता


'मुनीर' इस ख़ूबसूरत ज़िंदगी को
हमेशा एक सा होना नहीं है.

मुनीर नियाजी 

Sunday, April 18, 2021

मुस्कुराहट शायरी

मुस्कुराहट है हुस्न का ज़ेवर, 
मुस्कुराना न भूल जाया करो.

धूप निकली है बारिशों के बाद, 
वो अभी रो के मुस्कुराए हैं.

दिल में तूफ़ान हो गया बरपा, 
तुम ने जब मुस्कुरा के देख लिया.

देखने वालो तबस्सुम को करम मत समझो, 
उन्हें तो देखने वालों पे हँसी आती है.

तुझे हम दोपहर की धूप में देखेंगे ऐ ग़ुंचे, 
अभी शबनम के रोने पर हँसी मालूम होती है.

यूँ मुस्कुराए जान सी कलियों में पड़ गई, 
यूँ लब-कुशा हुए कि गुलिस्ताँ बना दिया.




Wednesday, April 14, 2021

ग़लतफहमी सी होती है के मैं खुदा तो नहीं

|| सिर्फ ज़रूरतों में ही ना याद किया करो मुझे

   ग़लतफहमी सी होती है के मैं खुदा तो नहीं ||

मेरी सादगी देख क्या चाहता हूँ

 


तेरे इश्क़ की इन्तहा चाहता हूँ
मेरी सादगी देख क्या चाहता हूँ
भरी बज़्म में राज़ की बात कह दी
बड़ा बे-अदब हूँ, सज़ा चाहता हूँ.

खुद ही तुझसे ही राज की बात कह दी
बड़ा बे-अदब हूँ, सज़ा चाहता हूँ.

पर तू ये बता कितनी रातें चैन से सोया है।

 कहीं बेहतर है तेरी अमीरी से मुफलिसी मेरी,

चंद सिक्कों की खातिर तूने क्या नहीं खोया है,

माना नहीं है मखमल का बिछौना मेरे पास,

पर तू ये बता कितनी रातें चैन से सोया है।

ख्वाहिश शायरी

ख्वाहिशों के काफिले बड़े अजीब होते हैं ,

ये गुज़रते वहीं से हैं जहां रास्ते नही होते।


मेरे टूटने की वजह मेरे जोहरी से पूछो,

उस की ख्वाहिश थी कि मुझे थोडा और तराशा जाये.!!


ज़रूरतों को दरकिनार कर ख़्वाहिशों  के पीछे भागते हैं,

दिन का सुकून तो गंवाया था अब रातों में भी जागते हैं!



Wednesday, April 7, 2021

यहाँ लिबास की क़ीमत है आदमी की नहीं

यहाँ लिबास की क़ीमत है आदमी की नहीं 
मुझे गिलास बड़े दे शराब कम कर दे ।

~ बशीर बद्र 

मेरा पैग़ाम मोहब्बत है जहाँ तक पहुँचे ।

उन का जो फ़र्ज़ है वो अहल-ए-सियासत जानें
मेरा पैग़ाम मोहब्बत है जहाँ तक पहुँचे ।

~ जिगर मुरादाबादी 

उतना सफ़र आसान रहेगा

जितना कम सामान रहेगा
उतना सफ़र आसान रहेगा

जितनी भारी गठरी होगी
उतना तू हैरान रहेगा

~ गोपालदास 'नीरज'