बहुत मुश्किल से करता हूँ,
तेरी यादों का कारोबार,
मुनाफा कम है,
पर गुज़ारा हो ही जाता है!
गुलज़ार
आशु तो कुछ भी नहीं आसूँ के सिवा, जाने क्यों लोग इसे पलकों पे बैठा लेते हैं।
बहुत मुश्किल से करता हूँ,
तेरी यादों का कारोबार,
मुनाफा कम है,
पर गुज़ारा हो ही जाता है!
गुलज़ार
Aik muddat se teri yaad bhi aayi nahin humein,
Aur hum bhool gaye ho’n tujhe aisa bhi nahin!
Sunte hain, k mil jaati hai, har cheez dua se,
Ek roz tumhe maang ke dekhenge khuda se..
हम ने सीने से लगाया दिल न अपना बन सका!
मुस्कुरा कर तुम ने देखा दिल तुम्हारा हो गया,
वो मुस्कुरा के मोहब्बत से जब भी मिलते हैं,
मेरी नज़र में हज़ारों गुलाब खिलते हैं!
उनके लबों की तबस्सुम देती हैं सुकून मुझको,
मिलते हैं जब वो मिलती हैं खुशियाँ मुझको!