Friday, January 3, 2020

ख़ामोश हो क्यूँ दादे -जफ़ा क्यूँ नहीं देते

ख़ामोश हो क्यूँ दादे -जफ़ा क्यूँ नहीं देते 
बिस्मिल हो तो क़ातिल को दुआ क्यूँ नहीं देते 

रहज़न हो तो हाज़िर है मता-ए-दिल-ओ-जाँ भी 
रहबर हो तो मन्ज़िल का पता क्यूँ नहीं देते

~ अहमद फ़राज़

Thursday, January 2, 2020

और साथ मिरा उसको गवारा भी नहीं है

पहले तो ये मौजें भी हिमायत में खड़ी थीं, 
अब मेरा मददगार किनारा भी नहीं है! 

जाता भी नहीं छोड़के वो मुझको अकेला, 
और साथ मिरा उसको गवारा भी नहीं है! 

मेरी आंखों में तिरे प्यार का आंसू आए

मेरी आंखों में तिरे प्यार का आंसू आए
कोई ख़ुशबू मैं लगाऊं तिरी ख़ुशबू आए

वक़्त-ए-रुख़्सत कहीं तारे कहीं जुगनू आए
हार पहनाने मुझे फूल से बाज़ू आए

मैं ने दिन रात ख़ुदा से ये दुआ मांगी थी
कोई आहट न हो दर पर मिरे जब तू आए

इन दिनों आप का आलम भी अजब आलम है
तीर खाया हुआ जैसे कोई आहू आए

उस की बातें कि गुल-ओ-लाला पे शबनम बरसे
सब को अपनाने का उस शोख़ को जादू आए

उस ने छू कर मुझे पत्थर से फिर इंसान किया
मुद्दतों बाद मिरी आंखों में आंसू आए

बशीर बद्र 

अब डेरे मंज़िल ही पे डाले जाएँगे!

अब टूट गिरेंगी ज़ंजीरें अब ज़िंदानों की ख़ैर नहीं, 
जो दरिया झूम के उट्ठे हैं तिनकों से न टाले जाएँगे! 

कटते भी चलो, बढ़ते भी चलो, बाज़ू भी बहुत हैं सर भी बहुत, 
चलते भी चलो कि अब डेरे मंज़िल ही पे डाले जाएँगे! 

राहत इंदौरी के लिखे गए 10 मशहूर शेर

राहत इंदौरी के लिखे गए 10 मशहूर शेर

1. न हम-सफ़र न किसी हम-नशीं से निकलेगा

हमारे पाँव का काँटा हमीं से निकलेगा

2. उस की याद आई है साँसो ज़रा आहिस्ता चलो

धड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है

3. दोस्ती जब किसी से की जाए

दुश्मनों की भी राय ली जाए

4. नए किरदार आते जा रहे हैं

मगर नाटक पुराना चल रहा है

5. हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे

कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते

6. मैं आख़िर कौन सा मौसम तुम्हारे नाम कर देता

यहाँ हर एक मौसम को गुज़र जाने की जल्दी थी

7. घर के बाहर ढूँढता रहता हूँ दुनिया

घर के अंदर दुनिया-दारी रहती है

8. ये हवाएँ उड़ न जाएँ ले के काग़ज़ का बदन

दोस्तो मुझ पर कोई पत्थर ज़रा भारी रखो

9. अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है

उम्र गुज़री है तिरे शहर में आते जाते 

10. एक ही नद्दी के हैं ये दो किनारे दोस्तो

दोस्ताना ज़िंदगी से मौत से यारी रखो

मेरी आंखों में तिरे प्यार का आंसू आए

मेरी आंखों में तिरे प्यार का आंसू आए
कोई ख़ुशबू मैं लगाऊं तिरी ख़ुशबू आए

वक़्त-ए-रुख़्सत कहीं तारे कहीं जुगनू आए
हार पहनाने मुझे फूल से बाज़ू आए

मैं ने दिन रात ख़ुदा से ये दुआ मांगी थी
कोई आहट न हो दर पर मिरे जब तू आए

इन दिनों आप का आलम भी अजब आलम है
तीर खाया हुआ जैसे कोई आहू आए

उस की बातें कि गुल-ओ-लाला पे शबनम बरसे
सब को अपनाने का उस शोख़ को जादू आए

उस ने छू कर मुझे पत्थर से फिर इंसान किया
मुद्दतों बाद मिरी आंखों में आंसू आए

बशीर बद्र 

"ये अलग बात है के खामोश खड़े रहते है,

"ये अलग बात है के खामोश खड़े रहते है,
फिर भी जो बड़े लोग है, वो बड़े रहते है,

ऐसे दरवेशों से मिलता है हमारा शिगरा,
जिनके जूतो मे भी ताज पड़े रहते है! 

- @rahatindori 

तू नया है तो दिखा सुब्ह नई शाम नई

तू नया है तो दिखा सुब्ह नई शाम नई 
वर्ना इन आँखों ने देखे हैं नए साल कई 


Wednesday, January 1, 2020

जिंदगी क्या है खुद ही समझ जाओगे

मैं और तुम तो वही, पर बात कुछ नयी हो।

कल सुबह की धूप और शाम कुछ नयी हो, 
मैं और तुम तो वही, पर बात कुछ नयी हो।