उसूलों पे जहाँ आँच आये टकराना ज़रूरी है,
जो ज़िन्दा हों तो फिर ज़िन्दा नज़र आना ज़रूरी है!
Monday, July 8, 2019
उसूल, टकराना, जिंदा नज़र आना
Friday, July 5, 2019
Thursday, July 4, 2019
वो जिन्दगी ही क्या
हद-ए-शहर से निकली तो गाँव गाँव चली
कुछ यादें मेरे संग पांव पांव चली
सफ़र जो धूप का किया तो तजुरबा हुआ
वो जिंदगी ही क्या जो छाँव छाँव चली!
Wednesday, July 3, 2019
कुछ तो खास है
कुछ तो खास है, जो तुझे मुझसे जोड़े रखता है,
वरना इतना माफ़ तो मैंने खुद को भी नहीं किया है!
Tuesday, July 2, 2019
किन लफ़्ज़ों में
किन लफ्जों में लिखूँ मैं अपने इंतज़ार को तुम्हें,
बेजुबां है इश्क़ मेरा ढूंढ़ता है खामोशी से तुझे!
मुझ से आगे
“भीड़ से छूटा हुआ रोज यही सोचता हूँ ,
क्यूँ मेरी बात निकल जाती है मुझ से आगे ?
एक अरसे से मैं और रात साथ चलते हैं ,
सुब्ह तक रात निकल जाती है मुझ से आगे..!”
~कुमार विश्वास
ख्वाबों की दुनिया, जगाया क्यों नहीं
अभी खोए हुए है दोस्त ख्वाबों की दुनिया में,
उठते ही कहेंगे सुनो तुमने जगाया क्यों नहीं!
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