Saturday, September 1, 2018

अल्फाज दिल से निकलते हैं

राहों का ख़्याल है मुझे, मंज़िल का हिसाब नहीं रखता।
अल्फ़ाज़ दिल से निकलते है, मैं कोई किताब नहीं रखता।।

तराशना

ज़िन्दगी ये तेरी खरोंचे हैं मुझ पर, या;
फिर तू मुझे तराशने की कोशिश में है।

खता ये हुई

गुनाह किये होते, तो मांफ भी हो जाते साहिब;
ख़ता तो मुझसे ये हुई, कि उनसे इश्क़ हो गया।

मुक़द्दर की बात

किस पर ठहरती है नज़र,
ये नज़र-नज़र की बात है;
कौन, किसका, कब बन जाता है अजीज,
यह मुकद्दर की बात है!

😊सर उठा के जीओ 😊

तुम भी सर उठा कर,
जी सकते हो दुनिया में;
बस एक दिन,
मोबाइल घरपर ही भूल जाना। 😊

इजहार ए इश्क़

‎तेरे बदन से छिटककर‬, मेरे चेहरे से लिपटा‬,
‪‎इज़हार ए इश्क़, तेरा‬ ‎ये दुपट्टा करता है!

दिल कि सुनाते हैं

कभी आओ, बैठते है, बतलाते है;
दुनिया की फिक्र छोड़, दिल की सुनाते है!

हमारी रज़ा?

आंखें पढ़ो, और जानो हमारी  रज़ा क्या है,
हर बात लफ़्ज़ों से बयान हो, तो मज़ा क्या है?

इजहार ए इश्क़

‎तेरे बदन से छिटककर‬, मेरे चेहरे से लिपटा‬,
‪‎इज़हार ए इश्क़, तेरा‬ ‎ये दुपट्टा करता है!

तराशना

ज़िन्दगी ये तेरी खरोंचे हैं मुझ पर, या;
फिर तू मुझे तराशने की कोशिश में है।