जब आग भेजी है तो पानी भी भेज दो!
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Saturday, September 26, 2020
Thursday, July 9, 2020
आँखों को शराब कर के तो देखो
आँखों को शराब कर के तो देखो,
होठों को गुलाब कर के तो देखो.
खण्डहर में भी आएगा महल का मजा,
बस एक बार नियत खराब कर के तो देखो.
Thursday, May 7, 2020
अब तो उतनी भी मयस्सर नहीं मय-ख़ाने में
अब तो उतनी भी मयस्सर नहीं मय-ख़ाने में
जितनी हम छोड़ दिया करते थे पैमाने में
- दिवाकर राही
आए थे हँसते खेलते मय-ख़ाने में 'फ़िराक़'
जब पी चुके शराब तो संजीदा हो गए
- फ़िराक़ गोरखपुरी
दिल थामता कि चश्म पर करता तेरी निगाह,
सागर को देखता कि मैं शीशा संभालता।
- हकीम सनाउल्लाह फिराक़
मुस्कराते हुए यूं आए वो मयख़ाने में,
रुक गयी सांस छलकते हुए पैमानों की।
- जोश मलीहाबादी
Wednesday, May 6, 2020
शराब शायरी
#1
तुम्हारी आँखों की तौहीन है ज़रा सोचो
तुम्हारा चाहने वाला शराब पीता है
(मुनव्वर राना)
#2
बे-पिए ही शराब से नफ़रत
ये जहालत नहीं तो फिर क्या है
(साहिर लुधियानवी)
#3
ज़ाहिद शराब पीने से काफ़िर हुआ मैं क्यूँ
क्या डेढ़ चुल्लू पानी में ईमान बह गया
(शेख़ इब्राहीम ज़ौक़)
#4
साक़ी मुझे शराब की तोहमत नहीं पसंद
मुझ को तिरी निगाह का इल्ज़ाम चाहिए
(अब्दुल हमीद अदम)
#5
मिरे अश्क भी हैं इस में ये शराब उबल न जाए
मिरा जाम छूने वाले तिरा हाथ जल न जाए
(अनवर मिर्ज़ापुरी)
#6
बे-पिए शैख़ फ़रिश्ता था मगर
पी के इंसान हुआ जाता है
(शकील बदायुनी)
#7
वाइज़ बड़ा मज़ा हो अगर यूँ अज़ाब हो
दोज़ख़ में पाँव हाथ में जाम-ए-शराब हो
(दाग़ देहलवी)
#8
पी शौक़ से वाइज़ अरे क्या बात है डर की
दोज़ख़ तिरे क़ब्ज़े में है जन्नत तिरे घर की
(शकील बदायुनी)
#9
शिरकत गुनाह में भी रहे कुछ सवाब की
तौबा के साथ तोड़िए बोतल शराब की
(ज़हीर देहलवी)
#10
ठुकराओ अब कि प्यार करो मैं नशे में हूँ
जो चाहो मेरे यार करो मैं नशे में हूँ
(शाहिद कबीर)
Sunday, February 9, 2020
आओ कहीं शराब पिएँ रात हो गई
फिर यूँ हुआ कि वक़्त का पाँसा पलट गया
उम्मीद जीत की थी मगर मात हो गई
कुछ भी बचा न कहने को हर बात हो गई
आओ कहीं शराब पिएँ रात हो गई
~ #निदा_फ़ाज़ली
Saturday, November 23, 2019
ख़ुद अपनी मस्ती है जिस ने मचाई है हलचल नशा शराब में होता तो नाचती बोतल
ख़ुद अपनी मस्ती है जिस ने मचाई है हलचल
नशा शराब में होता तो नाचती बोतल
- आरिफ़ जलाली
ख़ुद अपनी मस्ती है जिस ने मचाई है हलचल नशा शराब में होता तो नाचती बोतल
ख़ुद अपनी मस्ती है जिस ने मचाई है हलचल
नशा शराब में होता तो नाचती बोतल
- आरिफ़ जलाली
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