Wednesday, July 10, 2024

एहसास में फूल खिल रहे हैं

 

एहसास में फूल खिल रहे हैं, पतझड़ के 'अजीब सिलसिले हैं



एहसास में फूल खिल रहे हैं
पतझड़ के 'अजीब सिलसिले हैं

कुछ इतनी शदीद तीरगी है
आँखों में सितारे तैरते हैं

देखें तो हवा जमी हुई है
सोचें तो दरख़्त झूमते हैं

सुक़रात ने ज़हर पी लिया था
हम ने जीने के दुख सहे हैं

हम तुझ से बिगड़ के जब भी उठ्ठे
फिर तेरे हुज़ूर आ गए हैं

हम 'अक्स हैं एक दूसरे का
चेहरे ये नहीं हैं आइने हैं

लम्हों का ग़ुबार छा रहा है
यादों के चराग़ जल रहे हैं

सूरज ने घने सनोबरों में
जाले से शु'आ'ओं के बुने हैं

यकसाँ हैं फ़िराक़-ओ-वस्ल दोनों
ये मरहले एक से कड़े हैं

पा कर भी तो नींद उड़ गई थी
खो कर भी तो रत-जगे मिले हैं

जो दिन तिरी याद में कटे थे
माज़ी के खंडर बने खड़े हैं

जब तेरा जमाल ढूँढ़ते थे
अब तेरा ख़याल ढूँढ़ते हैं

हम दिल के गुदाज़ से हैं मजबूर
जब ख़ुश भी हुए तो रोए हैं

हम ज़िंदा हैं ऐ फ़िराक़ की रात
प्यारी तिरे बाल क्यूँ खुले हैं

चाँद सुकूँ तो देता है, ज़द से बाहर है तो क्या

 

चाँद सुकूँ तो देता है, ज़द से बाहर है तो क्या

तन्हा मंज़र हैं तो क्या 
सात समुंदर हैं तो क्या 

ज़रा सिकुड़ के सो लेंगे 
छोटी चादर है तो क्या 

चाँद सुकूँ तो देता है 
ज़द से बाहर है तो क्या 

हम भी शीशे के न हुए 
हर सू पत्थर हैं तो क्या 

हम सा दिल ले कर आओ 
जिस्म बराबर है तो क्या 

बिजली सब पर गिरती है 
मेरा ही घर है तो क्या 

डगर डगर भटकाती है 
दिल के अंदर है तो क्या


ध्रुव गुप्त

प्रश्न है वो ज़िन्दगी का, वो ही हल है

झील है या झील में वो इक कँवल है ,

जो ज़ुबाँ पर चढ़ चुकी है वो ग़ज़ल है ।

बात उसकी क्या कहूँ मैं तुमसे यारों ,

प्रश्न है वो ज़िन्दगी का, वो ही हल है ।

तेरा होना एक तरफ

 चाँदी सोना एक तरफ,

 तेरा होना एक तरफ,

एक तरफ़ तेरी आखें,

 जादू टोना एक तरफ़.

तुम दूर हो तो प्यार का मौसम न आएगा

तुम दूर हो तो प्यार का मौसम न आएगा
अब के बरस बहार का मौसम न आएगा

चूमूँगा किस की ज़ुल्फ़ घटाओं को देख कर
इक जुर्म-ए-ख़ुश-गवार का मौसम न आएगा

छलके शराब बर्क़ गिरे या जलें चराग़
ज़िक्र-ए-निगाह-ए-यार का मौसम न आएगा

वादा-ख़िलाफ़ियों को तरस जाएगा यक़ीं
रातों को इंतिज़ार का मौसम न आएगा

तुझ से बिछड़ के ज़िंदगी हो जाएगी तवील
एहसास के निखार का मौसम न आएगा 

Asad Bhopali

और तुम्हारी यादें ....

ये पहली बारिश
और तुम्हारी यादें ....
ये मिट्टी की खुशबू
और तुम्हारी यादें ....
हमारी पहली मुलाकात की बरसी
और तुम्हारी यादें!!!!!

 

एक चुम्बन में प्रणय फलीभूत हो जाता है

क तीक्ष्ण अपांग से कविता उत्पन्न हो जाती है,
एक चुम्बन में प्रणय फलीभूत हो जाता है,
पर मैं अखिल विश्व का प्रेम खोजता फिरता हूँ,
क्यों कि मैं उस के असंख्य हृदयों का गाथाकार हूँ।

एक ही टीस से आँसू उमड़ आते हैं,
एक झिड़की से हृदय उच्छ्वसित हो उठता है।
पर मैं अखिल विश्व की पीड़ा संचित कर रहा हूँ-
क्यों कि मैं जीवन का कवि हूँ।
-

अज्ञेय

Tuesday, May 28, 2024

मैनु तेरा शबाब ले बैठा

​मैंनू तेरा शबाब ले बैठा,


रंग गोरा गुलाब ले बैठा।
 

किन्नी-बीती ते किन्नी बाकी है,


मैंनू एहो हिसाब ले बैठा।
 

मैंनू जद वी तूसी तो याद आये,


दिन दिहाड़े शराब ले बैठा।
 

चन्गा हुन्दा सवाल ना करदा,


मैंनू तेरा जवाब ले बैठा।

शिव कुमार बटालवी

Monday, May 27, 2024

तुम ख़ामोशी बन इन लबों पे रहती हो

​तुम ख़ामोशी बन इन लबों पे रहती हो कोई बात हो क्या,

अक्सर ख़ुद ही से छुपी सी रहती हो कोई राज़ क्या,
हर शख्स तरसता है तेरे इक दीदार को
जरा हमें भी बताओ कोई आफताब हो क्या।

तुम ख़ामोशी बन इन लबों पे रहती हो,
कोई अनकही बात हो क्या.
अक्सर ख़ुद ही से छुपी सी रहती हो,
दिल में छुपाए कोई राज़ क्या.


मेरे गीत तुम्हारे पास सहारा पाने आएँगे

​मेरे गीत तुम्हारे पास सहारा पाने आएँगे

मेरे बाद तुम्हें ये मेरी याद दिलाने आएँगे

हौले—हौले पाँव हिलाओ,जल सोया है छेड़ो मत
हम सब अपने—अपने दीपक यहीं सिराने आएँगे

थोड़ी आँच बची रहने दो, थोड़ा धुआँ निकलने दो
कल देखोगी कई मुसाफ़िर इसी बहाने आएँगे

उनको क्या मालूम विरूपित इस सिकता पर क्या बीती
वे आये तो यहाँ शंख-सीपियाँ उठाने आएँगे

रह—रह आँखों में चुभती है पथ की निर्जन दोपहरी
आगे और बढ़ें तो शायद दृश्य सुहाने आएँगे
मेले में भटके होते तो कोई घर पहुँचा जाता
हम घर में भटके हैं कैसे ठौर-ठिकाने आएँगे

हम क्या बोलें इस आँधी में कई घरौंदे टूट गए
इन असफल निर्मितियों के शव कल पहचाने जाएँगे। 
Dushyant Kumar