रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है,
चाँद पागल है अँधेरे में निकल पड़ता है
एक दीवाना मुसाफ़िर है मिरी आँखों में
वक़्त-बे-वक़्त ठहर जाता है चल पड़ता है
अपनी ताबीर के चक्कर में मिरा जागता ख़्वाब
रोज़ सूरज की तरह घर से निकल पड़ता है
रोज़ पत्थर की हिमायत में ग़ज़ल लिखते हैं
रोज़ शीशों से कोई काम निकल पड़ता है
उस की याद आई है साँसो ज़रा आहिस्ता चलो
धड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है
Sunday, September 26, 2021
उस की याद आई है साँसो ज़रा आहिस्ता चलो
Wednesday, September 15, 2021
आज भी तेरा दिल मेरे लिए बेकरार हैं.
वादा नहीं कोई तेरा,
फिर भी इंतज़ार है.
बिछड़ने के बाद भी,
हमें तुमसे प्यार हैं,
तेरे भी चेहरे की उदासी
बता रही हैं.
आज भी तेरा दिल,
मेरे लिए बेकरार हैं.
Wednesday, August 4, 2021
नजर झुका के रखे
*"Ye Suraj Se Bhi Keh Do Ke Apni Aag Bujha Ke Kare*
*Agar Mujhse Baatein Karni Hai, To Fir Nazar Jhuka Ke Kare"*
Friday, July 2, 2021
ये मर्ज़-ए-इश्क़ तो जान के साथ ही जाएगा
ज़ख्म-ए-दिल का इलाज़ कैसे मुमकिन है तबीब
ये मर्ज़-ए-इश्क़ तो जान के साथ ही जाएगा।
अहवाल क्या बयाँ मैं करूँ हाए ऐ #तबीब
है दर्द उस जगह कि जहाँ का नहीं इलाज
साये कज़ा के जब बहुत करीब आ गए
दीवार बन के दर्मियाँ तबीब* आ गए
घर जब बना रहा था दिलों में वबा का ख़ौफ़
बन कर मसीहा कितने ही हबीब आ गए
तदबीर मेरे इश्क़ की क्या फ़ाएदा तबीब
अब जान ही के साथ ये आज़ार जाएगा
~ मीर तक़ी मीर
तबीब- डॉक्टर
Thursday, July 1, 2021
बस इसी का नाम जिंदगी है
कुछ दबी हुई ख्वाहिशें हैं, कुछ मंद मुस्कुराहटें,
कुछ खोये हुए सपने हैं, कुछ अनसुनी आहटें.
कुछ सुकून भरी यादें है, कुछ दर्द भरे लम्हात,
कुछ थमें हुए तूफाँ है, कुछ मद्धम सी बरसात.
कुछ अनकहे अल्फ़ाज़ हैं, कुछ नासमझ इशारे,
कुछ ऐसे मझधार हैं, जिनके मिलते नहीं किनारे.
कुछ उलझने हैं राहों में, कुछ कोशिशें बेहिसाब.
बस इसी का नाम जिंदगी है, चलते रहिये जनाब!
Tuesday, June 29, 2021
ठुकराया हमने भी बहुतों को है तेरी खातिर
ठुकराया हमने भी बहुतों को है तेरी खातिर,
तुझसे फासला भी शायद उनकी बद्दुआओं का असर है!
उसका उदास होना मुझे अच्छा नही लगता!
मुझसे बिछड़ कर ख़ुश है तो उसे खुश रहने दो,
मुझसे मिल कर उसका उदास होना मुझे अच्छा नही लगता!
क्यूँ पूछते हो हम ने बताना तो है नहीं..
बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं
हम बे-घरों का कोई ठिकाना तो है नहीं
वो जो हमें अज़ीज़ है कैसा है कौन है
क्यूँ पूछते हो हम ने बताना तो है नहीं...
Friday, June 18, 2021
तुम्हारी धड़कनों का दिल में इतना शोर लगता है
तुम्हारी धड़कनों का दिल में इतना शोर लगता है
कोई दिल्ली पुकारे तो हमें लाहौर लगता है
तुम्हारे खत चुरा कर ले गया कल रात कमरे से
तुम्हारा ही दीवाना शहर का एक चोर लगता है
Wednesday, June 16, 2021
ज़ख़्मों को फिर मरहम की ज़रूरत नहीं होती
दो लफ़्ज़ मोहब्बत के असर करते हैं इतना
ज़ख़्मों को फिर मरहम की ज़रूरत नहीं होती
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