Wednesday, April 14, 2021

पर तू ये बता कितनी रातें चैन से सोया है।

 कहीं बेहतर है तेरी अमीरी से मुफलिसी मेरी,

चंद सिक्कों की खातिर तूने क्या नहीं खोया है,

माना नहीं है मखमल का बिछौना मेरे पास,

पर तू ये बता कितनी रातें चैन से सोया है।

ख्वाहिश शायरी

ख्वाहिशों के काफिले बड़े अजीब होते हैं ,

ये गुज़रते वहीं से हैं जहां रास्ते नही होते।


मेरे टूटने की वजह मेरे जोहरी से पूछो,

उस की ख्वाहिश थी कि मुझे थोडा और तराशा जाये.!!


ज़रूरतों को दरकिनार कर ख़्वाहिशों  के पीछे भागते हैं,

दिन का सुकून तो गंवाया था अब रातों में भी जागते हैं!



Wednesday, April 7, 2021

यहाँ लिबास की क़ीमत है आदमी की नहीं

यहाँ लिबास की क़ीमत है आदमी की नहीं 
मुझे गिलास बड़े दे शराब कम कर दे ।

~ बशीर बद्र 

मेरा पैग़ाम मोहब्बत है जहाँ तक पहुँचे ।

उन का जो फ़र्ज़ है वो अहल-ए-सियासत जानें
मेरा पैग़ाम मोहब्बत है जहाँ तक पहुँचे ।

~ जिगर मुरादाबादी 

उतना सफ़र आसान रहेगा

जितना कम सामान रहेगा
उतना सफ़र आसान रहेगा

जितनी भारी गठरी होगी
उतना तू हैरान रहेगा

~ गोपालदास 'नीरज' 

मैं तेरे पास हूँ तू मेरे पास है।

शाम भी खास है वक़्त भी खास है,
मुझको एहसास है तुझको एहसास है,

इससे ज्यादा हमें और क्या चाहिए,
मैं तेरे पास हूँ तू मेरे पास है।

~ अनामिका जैन अम्बर

तू बस मुझे आवाज़ दे

मैंने कब कहा मुझे गुलाब दे,
या फिर अपनी महोब्बत से
नवाज़ दे…

आज बहुत उदास है मन मेरा
गैर बनके ही सही….

तू बस मुझे आवाज़ दे

वो भी पत्थर है

सारे पत्थर नहीं होते हैं मलामत का निशाँ 
वो भी पत्थर है जो मंज़िल का निशाँ देता है 
- परवेज़ अख़्तर


पीना उसी का है जो पिए बेखुदी के साथ!

गिन गिन के जिसने जाम पिए उसने क्या पिए, 
पीना उसी का है जो पिए बेखुदी के साथ! 

Friday, April 2, 2021

बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर

 बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर

जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियां उड़ जाएं
- राहत इंदौरी


ये ऐसा क़र्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता
में जब तक घर न लौटूं मेरी मां सज्दे में रहती है
- मुनव्वर राना 

मैं वो पल था जो खा गया सदियां
सब ज़माने गुज़र गए मुझ में
- अम्मार इक़बाल


हर धड़कते पत्थर को लोग दिल समझते हैं
उम्रें बीत जाती हैं दिल को दिल बनाने में
- बशीर बद्र


कैसे कह दूं कि मुझे छोड़ दिया है उस ने
बात तो सच है मगर बात है रुस्वाई की
- परवीन शाकिर 


तेरी बातें ही सुनाने आए
दोस्त भी दिल ही दुखाने आए
- अहमद 


उसी को जीने का हक़ है जो इस ज़माने में


इधर का लगता रहे और उधर का हो जाए 
- वसीम बरेलवी 
 

कितनी दिलकश हो तुम कितना दिल-जू हूं मैं


क्या सितम है कि हम लोग मर जाएंगे 
- जौन एलिया