कहीं बेहतर है तेरी अमीरी से मुफलिसी मेरी,
चंद सिक्कों की खातिर तूने क्या नहीं खोया है,
माना नहीं है मखमल का बिछौना मेरे पास,
पर तू ये बता कितनी रातें चैन से सोया है।
आशु तो कुछ भी नहीं आसूँ के सिवा, जाने क्यों लोग इसे पलकों पे बैठा लेते हैं।
कहीं बेहतर है तेरी अमीरी से मुफलिसी मेरी,
चंद सिक्कों की खातिर तूने क्या नहीं खोया है,
माना नहीं है मखमल का बिछौना मेरे पास,
पर तू ये बता कितनी रातें चैन से सोया है।
ख्वाहिशों के काफिले बड़े अजीब होते हैं ,
ये गुज़रते वहीं से हैं जहां रास्ते नही होते।
मेरे टूटने की वजह मेरे जोहरी से पूछो,
उस की ख्वाहिश थी कि मुझे थोडा और तराशा जाये.!!
ज़रूरतों को दरकिनार कर ख़्वाहिशों के पीछे भागते हैं,
दिन का सुकून तो गंवाया था अब रातों में भी जागते हैं!
बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियां उड़ जाएं
- राहत इंदौरी
ये ऐसा क़र्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता
में जब तक घर न लौटूं मेरी मां सज्दे में रहती है
- मुनव्वर राना
मैं वो पल था जो खा गया सदियां
सब ज़माने गुज़र गए मुझ में
- अम्मार इक़बाल
हर धड़कते पत्थर को लोग दिल समझते हैं
उम्रें बीत जाती हैं दिल को दिल बनाने में
- बशीर बद्र
कैसे कह दूं कि मुझे छोड़ दिया है उस ने
बात तो सच है मगर बात है रुस्वाई की
- परवीन शाकिर
तेरी बातें ही सुनाने आए
दोस्त भी दिल ही दुखाने आए
- अहमद
उसी को जीने का हक़ है जो इस ज़माने में
कितनी दिलकश हो तुम कितना दिल-जू हूं मैं