सूखे दरख़्त भी खिल उठेंगे हुस्न-ए-बयार में!
खुश्क हो जाएगा!
ना उलझा करो हम से,
वरना इश्क़ हो जाएगा!
मेरा ज़िक्र ही कहाँ था तेरी दास्ताँ से पहले ..!!
कि तेरा ज़िक्र भी आएगा इस फ़साने में !!
सपनो का बहाना मिल जाए!
तुम जो मिल जाओ तो,
जीने का बहाना मिल जाए!
अब मैं अक्सर मैं नहीं रहता, तुम हो जाता हूँ!
कि मैं हूँ तेरा मुझे अपनी जान रहने दे!
तू मुझमें उतरता है कि मैं तुझमें उतरता हूँ।
ख़ुशियाँ आज कल चुनिंदा है,
कभी याद कर लिया करो इस नाचीज़ को,
ये शख्स अभी तक ज़िंदा है!
कोई हमसे इश्क़ करता, कम्बख्त नींद बहुत आती है!
तेरी ज़ुल्फों की साए में खुद को छुपा लूँ!
तेरे बदन की खुशबू में बस अब नहा लूँ,
गर फिर भी चैन ना आये, तो ये सब दुहरा लूँ!!
ज़ख्म मिटाने के लिए।
तेरी एक झलक ही काफ़ी है,
मेरे ठीक हो जाने के लिए!
एक फकीर कहने लगा.
पलकें तुम्हारी नाज़ुक है,
ख्वाबों का वज़न कम कीजिये!
निगाहे शेर पढ़ती हैं जो लब इरशाद करते है।
लोग तुझको मेरा महबूब समझते होंगे!
तुम खामोशी से कहना हम चुपके से सुनेंगे!
बारिशें हो तो भीग जाया कर।
काम ले कुछ हसीन होंठो से,
बातों-बातों मे मुस्कुराया कर।।
ये जवानी की बयार।
पहले भी रुख पे तेरे तिल था,
मगर कातिल न था!
अपना तो ईद हुआ है।
जब जब तेरा दीदार हुआ है,
अपना तो त्योहार हुआ है।।
तुमने ज़ुल्फ़ों को बहुत सर पर चढा रखा है ।
आसमान में एक आशियाना हमारा होता।
लोग तुम्हे दूर से देखते,
नज़दीक़ से देखने का, हक़ बस हमारा होता।।
अब यूँ दूर से पूछोगे, तो ख़ैरियत ही कहेंगे!
जरा सा जुनून दो।
उदास हूँ बहुत दिनों से,
मेरे दिल को सुकून दो!