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Thursday, May 21, 2020

मिजाज शायरी

अपनी आदत कि सब से सब कह दें
शहर का है मिज़ाज सन्नाटा
- सलमान अख़्तर


कुछ तो इनायतें हैं मिरे कारसाज़ की
और कुछ मिरे मिज़ाज ने तन्हा किया मुझे
- अकरम नक़्क़ाश



अभी फिर रहा हूँ मैं आप-अपनी तलाश में
अभी मुझ से मेरा मिज़ाज ही नहीं मिल रहा
- तारिक़ नईम


दिल दे तो इस मिज़ाज का परवरदिगार दे
जो रंज की घड़ी भी ख़ुशी से गुज़ार दे
- दाग़ देहलवी


चुप रहो क्यूँ मिज़ाज पूछते हो
हम जिएँ या मरें तुम्हें क्या है
- लाला माधव राम जौहर


फिर मिरी आँख हो गई नमनाक
फिर किसी ने मिज़ाज पूछा है
- असरार-उल-हक़ मजाज़

सब गए पूछने मिज़ाज उन का
मैं गया अपनी दास्ताँ ले कर
- जलील मानिकपूरी


पूछ लेते वो बस मिज़ाज मिरा
कितना आसान था इलाज मिरा
- फ़हमी बदायूंनी

तू जिधर जाए दिन निकल आए
रौशनी का मिज़ाज पैदा कर
- नुसरत मेहदी


सूफियाना मिज़ाज है अपना
मस्त रहते हैं अपनी मस्ती में
- राज़िक़ अंसारी

Friday, May 15, 2020

खबर शायरी

कुछ ख़बर होती तो मैं अपनी ख़बर क्यूं रखता
ये भी इक बे-ख़बरी थी कि ख़बर-दार रहा
- अनवर देहलवी


मुमकिन नहीं है शायद दोनों का साथ रहना
तेरी ख़बर जब आई अपनी ख़बर गई है
- मीर अहमद नवेद



ख़बर कर दे कोई उस बे-ख़बर को
मिरी हालत बिगड़ती जा रही है
- सय्यदा अरशिया हक़


एक ख़बर है तेरे लिए
दिल पर पत्थर भारी रख
- अमीर क़ज़लबा

जो दिल को है ख़बर कहीं मिलती नहीं ख़बर
हर सुब्ह इक अज़ाब है अख़बार देखना
- उबैदुल्लाह अलीम


अंजान तुम बने रहे ये और बात है
ऐसा तो क्या है तुम को हमारी ख़बर न हो
- अज्ञात

गिरते पेड़ों की ज़द में हैं हम लोग
क्या ख़बर रास्ता खुले कब तक
- अज़हर फ़राग़


तेरी ख़बर मिल जाती थी
शहर में जब अख़बार न थे
- आशुफ़्ता चंगेज़ी

हम वहां हैं जहां से हम को भी
कुछ हमारी ख़बर नहीं आती
- मिर्ज़ा ग़ालिब


हम ने कुछ गीत लिखे हैं जो सुनाना हैं तुम्हें
तुम कभी बज़्म सजाना तो ख़बर कर देना
- मंसूर उस्मानी