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Sunday, May 24, 2020

क्या ख़ता की थी हमनेजो तुम रूठ गए

क्या ख़ता की थी हमने
जो तुम रूठ गए हमसे
कहाँ मिलने की ख्वाहिश थी दिल में
अब दूर होते गए तुम दिल से
सोचा था कितने प्यारे सपने
पर वो सपने हो न सके अपने
अंज़ार - मिलाने से तुम क्यों डरते हो
अरफ़ - अंजल में यूँ भरते हो
तुम्हारी इन अदाओं से मैं हो गया फ़िगार
ऐसा किया तूने अंज़ार - शिकार
क्या मैं अमल करूँ तुमसे
ऐसा हाल बना दिया तुमने
आहत यह "अमर" दिल है
तेरे बिना सूनी यह महफ़िल
मन में तसव्वुर है तेरा
इसने जीना मुश्क़िल किया है मेरा
ज़िन्दा हूँ अभी प्यार की सौग़ात लिए
दिल की यादों को साथ लिए
अब तो उन लम्हों का इंतजार है
जब तुम खुद ही कहो 'हमें तुमसे प्यार है'।