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Wednesday, October 9, 2019

जहाँ तुम नहीं वहाँ हम अकेले हैं !

हजारो महफिलें हैं और लाखों मेले हैं,
पर जहाँ तुम नहीं वहाँ हम अकेले हैं !

सलाम

इस इंतिज़ार में बैठे हैं उन की महफ़िल में,
कि वो निगाह उठाएँ तो हम सलाम करें!