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Sunday, April 5, 2020

किताब शायरी

जाम गिरने लगा तो बहका शैख़
थामना थामना किताब किताब
- कशफ़ी मुल्तानी


ये जो ज़िंदगी की किताब है ये किताब भी क्या किताब है
कहीं इक हसीन सा ख़्वाब है कहीं जान-लेवा अज़ाब है
- राजेश रेड्डी

दिल मिरा साफ़ आइने की तरह
एक सादा किताब है यारो
- दानिश फ़राही


'मुनीर' तेरी ग़ज़ल अजब है
किसी सफ़र की किताब जैसी
- मुनीर नियाज़ी

दिल कि जिस पर हैं नक़्श-ए-रंगा-रंग
उस को सादा किताब होना था
- जिगर मुरादाबादी


पढ़ लिया हम ने हर्फ़ हर्फ़ उसे
उस का चेहरा किताब कैसा था
- हफ़ीज़ बनारसी

हर शख़्स है इश्तिहार अपना
हर चेहरा किताब हो गया है
- क़ैसर-उल जाफ़री


ग़ौर से पढ़ सको तो समझोगे
एक दिलकश किताब है दुनिया
- अहसन इमाम अहसन

नक़्श हैं अब वरक़ वरक़ दिल पर
चंद यादें किताब की सूरत
- ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर


'सदा' के पास है दुनिया का तजरबा वाइज़
तुम्हारी बात में बस फ़ल्सफ़ा किताब का है
- सदा अम्बालवी

Tuesday, October 15, 2019

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिले


अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिले
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिले

ढूंढ उजड़े हुए लोगों में वफ़ा के मोती
ये खज़ाने तुझे मुमकिन है ख़राबों में मिले

तू खुदा है, न मेरा इश्क फरिश्तों जैसा
दोनों इन्सां हैं तो क्यों इतने हिजाबों में मिले

ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो
नशा बढ़ता है शराबे जो शराबों में मिले 

अब न मैं हूँ, न तू है, न वो माज़ी है फ़राज़
जैसे दो साये तमन्ना के सराबों में मिले! 

-Faraz