*"Ye Suraj Se Bhi Keh Do Ke Apni Aag Bujha Ke Kare*
*Agar Mujhse Baatein Karni Hai, To Fir Nazar Jhuka Ke Kare"*
आशु तो कुछ भी नहीं आसूँ के सिवा, जाने क्यों लोग इसे पलकों पे बैठा लेते हैं।
*"Ye Suraj Se Bhi Keh Do Ke Apni Aag Bujha Ke Kare*
*Agar Mujhse Baatein Karni Hai, To Fir Nazar Jhuka Ke Kare"*
कुछ दबी हुई ख्वाहिशें हैं, कुछ मंद मुस्कुराहटें,
कुछ खोये हुए सपने हैं, कुछ अनसुनी आहटें.
कुछ सुकून भरी यादें है, कुछ दर्द भरे लम्हात,
कुछ थमें हुए तूफाँ है, कुछ मद्धम सी बरसात.
कुछ अनकहे अल्फ़ाज़ हैं, कुछ नासमझ इशारे,
कुछ ऐसे मझधार हैं, जिनके मिलते नहीं किनारे.
कुछ उलझने हैं राहों में, कुछ कोशिशें बेहिसाब.
बस इसी का नाम जिंदगी है, चलते रहिये जनाब!