Friday, July 2, 2021

ये मर्ज़-ए-इश्क़ तो जान के साथ ही जाएगा

ज़ख्म-ए-दिल का इलाज़ कैसे मुमकिन है तबीब
ये मर्ज़-ए-इश्क़ तो जान के साथ ही जाएगा।


अहवाल क्या बयाँ मैं करूँ हाए ऐ #तबीब 
है दर्द उस जगह कि जहाँ का नहीं इलाज

साये कज़ा के जब बहुत करीब आ गए
दीवार बन के दर्मियाँ तबीब* आ गए
घर जब बना रहा था दिलों में वबा का ख़ौफ़
बन कर मसीहा कितने ही हबीब आ गए

तदबीर मेरे इश्क़ की क्या फ़ाएदा तबीब
अब जान ही के साथ ये आज़ार जाएगा
~ मीर तक़ी मीर

तबीब- डॉक्टर 

Thursday, July 1, 2021

बस इसी का नाम जिंदगी है

कुछ दबी हुई ख्वाहिशें हैंकुछ मंद मुस्कुराहटें,

कुछ खोये हुए सपने हैंकुछ अनसुनी आहटें.

 

कुछ सुकून भरी यादें हैकुछ दर्द भरे लम्हात,

कुछ थमें हुए तूफाँ हैकुछ मद्धम सी बरसात.

 

कुछ अनकहे अल्फ़ाज़ हैंकुछ नासमझ इशारे,

कुछ ऐसे मझधार हैंजिनके मिलते नहीं किनारे.

 

कुछ उलझने हैं राहों मेंकुछ कोशिशें बेहिसाब.

बस इसी का नाम जिंदगी हैचलते रहिये जनाब!

Tuesday, June 29, 2021

ठुकराया हमने भी बहुतों को है तेरी खातिर

ठुकराया हमने भी बहुतों को है तेरी खातिर, 
तुझसे फासला भी शायद उनकी बद्दुआओं का असर है! 

उसका उदास होना मुझे अच्छा नही लगता!

मुझसे बिछड़ कर ख़ुश है तो उसे खुश रहने दो, 
मुझसे मिल कर उसका उदास होना मुझे अच्छा नही लगता!

क्यूँ पूछते हो हम ने बताना तो है नहीं..

बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं 
हम बे-घरों का कोई ठिकाना तो है नहीं  

वो जो हमें अज़ीज़ है कैसा है कौन है 
क्यूँ पूछते हो हम ने बताना तो है नहीं...

Friday, June 18, 2021

तुम्हारी धड़कनों का दिल में इतना शोर लगता है

तुम्हारी धड़कनों का दिल में इतना शोर लगता है
कोई दिल्ली पुकारे तो हमें लाहौर लगता है

तुम्हारे खत चुरा कर ले गया कल रात कमरे से
तुम्हारा ही दीवाना शहर का एक चोर लगता है 

Wednesday, June 16, 2021

ज़ख़्मों को फिर मरहम की ज़रूरत नहीं होती

दो लफ़्ज़ मोहब्बत के असर करते हैं इतना 
ज़ख़्मों को फिर मरहम की ज़रूरत नहीं होती 

Saturday, June 12, 2021

मेरी आंखों का कोई ख़्वाब सा

मेरी आंखों का
कोई ख़्वाब सा
मेरी ख़्वाहिशों का
कोई जवाब सा
वो मिला है मुझको
इस तरह
मेरी नेकियों का
कोई ख़्वाब सा ।

नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तुजू ही सही

नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तुजू ही सही
नहीं विसाल मयस्सर तो आरज़ू ही सही

न तन में ख़ून फ़राहम न अश्क आंखों में
नमाज़-ए-शौक़ तो वाजिब है बे-वज़ू ही सही

किसी तरह तो जमे बज़्म मय-कदे वालो
नहीं जो बादा-ओ-साग़र तो हाव-हू ही सही

गर इंतिज़ार कठिन है तो जब तलक ऐ दिल
किसी के वादा-ए-फ़र्दा की गुफ़्तुगू ही सही

दयार-ए-ग़ैर में महरम अगर नहीं कोई
तो 'फ़ैज़' ज़िक्र-ए-वतन अपने रू-ब-रू ही सही

Friday, May 28, 2021

मिट्टी शायरी

मिट्टी की आवाज़ सुनी जब मिट्टी ने
सांसों की सब खींचा-तानी ख़त्म हुई
- नज़र जावेद


भीगी मिट्टी की महक प्यास बढ़ा देती है
दर्द बरसात की बूंदों में बसा करता है
- मरग़ूब अली 

मिट्टी का बदन कर दिया मिट्टी के हवाले
मिट्टी को कहीं ताज-महल में नहीं रक्खा
- मुनव्वर राना 


मैं तो चाक पे कूज़ा-गर के हाथ की मिट्टी हूं
अब ये मिट्टी देख खिलौना कैसे बनती है
- ज़ेब ग़ौरी

मिट्टी में कितने फूल पड़े सूखते रहे
रंगीन पत्थरों से बहलता रहा हूं मैं
- असग़र मेहदी होश


मिट्टी पर उंगली से मिट्टी लिख देना
मैं ने अपना दिल बहलाना सीख लिया
- मुक़द्दस मालिक 

सुब्ह मिट्टी है शाम है मिट्टी
या'नी अपना मक़ाम है मिट्टी
- आसिम तन्हा


मिट्टी से कुछ ख़्वाब उगाने आया हूं
मैं धरती का गीत सुनाने आया हूं 
- नज़ीर क़ैसर

कोई ख़ुश्बू मिट्टी से आने लगी है
ज़मीं पर वो बूंदें गिराने लगी है
- साइमा जबीं महक


मिट्टी पे कोई नक़्श भी उभरा न रहेगा
गिर जाएगी दीवार तो साया न रहेगा
- नज़ीर क़ैसर