Saturday, November 24, 2018

आप आए हैं तो

आप आए हैं तो, अब घर में उजाला है बहुत,
कहिए, जलती रहे, या शमाँ बुझा दी जाए!

Wednesday, October 31, 2018

जिंदगी

प्रश्नपत्र है जिंदगी,
जस की तस स्वीकार्य!
कुछ भी वैकल्पिक नहीं,
सभी प्रश्न अनिवार्य!

Tuesday, October 30, 2018

भूख

भूख ने निचोड़ कर रख दिया है जिन्हें,
उनके तो हालात ना पूछो, तो अच्छा है!
मज़बूरी में जिनकी लाज लगी दांव पर,
क्या लाई सौगात ना पूछो तो अच्छा है!
बाढ़ के पानी में बह गए छप्पर जिनके,
कैसे गुजारी रात ना पूछो तो अच्छा है!

अजीब मिठास

अजीब मिठास है मुझ गरीब के खून में भी,
जिसे भी मौका मिलता है वो पीता जरुर है!

आबाद

वो जिनके हाथ में हर वक्त छाले रहते हैं,
आबाद उन्हीं के दम पर महल वाले रहते हैं!

थोड़ी सी जिन्दगी

कभी आंसू कभी ख़ुशी बेची,
हम गरीबों ने बेकसी बेची,
चंद सांसे खरीदने के लिए,
रोज थोड़ी सी जिन्दगी बेची!

खुशिओं का ताल्लुक

जब भी देखता हूँ, किसी गरीब को हँसते हुए,
यकीन आता है, खुशिओं का ताल्लुक दौलत से नहीं।

कशमकश

उलझा रही है मुझको,
यही कश्मकश आजकल!
तू आ बसी है मुझमें,
या मैं तुझमें कहीं खो गया हूँ? 😉

उलझी ही रहने दे

सुलझ जायेगी तो सिमटने लगेगी,
चल कुछ बातें उलझी ही रहने दे।
न वज़ह ढूँढ, न अंजाम तक जा,
बस इस कारवां को यूँ ही बहने दे।।

Friday, October 26, 2018

सफर

अभी तो चंद लफ्जों में समेटा है तुझे,
मेरी किताबों में तेरा सफर अभी बाकी है।