रोज गिर कर भी मुकम्मल खड़े हैं,
ऎ ज़िंदगी देख मेरे हौसलें तुझसे भी बड़े हैं।
ऎ ज़िंदगी देख मेरे हौसलें तुझसे भी बड़े हैं।
आशु तो कुछ भी नहीं आसूँ के सिवा, जाने क्यों लोग इसे पलकों पे बैठा लेते हैं।
हो सके तो पहचान लो,
मेरे दर्द का सबब मेरी नजर से!
मैं जुबान से कहुँगा तो,
कुछ लोग रुसवा हो जायेंगे!
दिल आबाद कहाँ रह पाएगा तेरी याद भुला देने से,
कमरा वीराँ हो जाता है इक तस्वीर हटा देने से!
*"इस फ़रेबी दुनिया में"*
*"मुझे दुनियादारी नही आती"*
*"झूठ को सच साबित करने की"*
*"मुझे कलाकारी नही आती"*
*"जिसमें सिर्फ मेरा हित हो"*
*"मुझे वो समझदारी नही आती"*
*"शायद मैं इसीलिए पीछे हूं"*
*"मुझे होशियारी नही आती"*
*"बेशक लोग ना समझे मेरी वफादारी"*
*"मगर 'यारो मुझे गद्दारी नही आती"...*