Tuesday, October 23, 2018

कहाँ हो, कैसे हो

दौलत नहीं, शोहरत नहीं,
ना वाह वाह चाहिये।
कहाँ हो ? कैसे हो ?
बस दो लब्जों की परवाह चाहिये।।

Saturday, October 13, 2018

बुरा वक़्त

दिल से निकली ही नहीं शाम जुदाई वाली,
तुम तो कहते थे बुरा वक़्त गुज़र जाता है।

दोस्त पुराने

अब ना मैं हूँ, ना बाकी हैं ज़माने मेरे​,
फिर भी मशहूर हैं शहरों में फ़साने मेरे​,
ज़िन्दगी है तो नए ज़ख्म भी लग जाएंगे​,
अब भी बाकी हैं कई दोस्त पुराने मेरे।

हिफाज़त

जो तीर भी आता वो खाली नहीं जाता,
मायूस मेरे दिल से सवाली नहीं जाता।
काँटे ही किया करते हैं फूलों की हिफाज़त,
फूलों को बचाने कोई माली नहीं जाता।

बेमुकाम

शायद यही ज़िंदगी का इम्तिहान होता है,
कि हर एक शख्स गुलाम होता है।
कोई ढूढ़ता है ज़िंदगी भर मंज़िलों को,
कोई पाकर मंज़िलों को भी बेमुकाम होता है।।

Sunday, October 7, 2018

कमी

कौन है जिसके पास कमी नहीं है।
आसमाँ के पास भी जमीं नही है।।

खास लिखते हैं

दिल के सच्चे लोग कुछ एहसास लिखते है,
मामूली शब्दों में ही सही, कुछ खास लिखते है!

कसमकश

इसका दिल रखा और कभी उसका दिल रखा,
इसी कसमकश में भूल गए खुद का दिल कहाँ रखा!

कमजोरियाँ

कमजोरियाँ मत ढूँढना मुझ में ए दोस्त,
एक तू भी शामिल है मेरी कमजोरियों में।।

Tuesday, October 2, 2018

कसमकश

उलझा रही है मुझको,
यही कश्मकश आजकल!
तू आ बसी है मुझमें,
या मैं तुझमें कहीं खो गया हूँ??