Showing posts with label sunshine. Show all posts
Showing posts with label sunshine. Show all posts

Friday, April 17, 2020

धूप shayari

क्या जाने क्यूं जलती है
सदियों से बिचारी धूप
- ज़फ़र ताबिश


धूप ने गुज़ारिश की
एक बूंद बारिश की
- मोहम्मद अल्वी


सुना है धूप को घर लौटने की जल्दी है
 आज वक़्त से पहले ही शाम कर देगी

- सदार आसिफ़


धूप छूती है बदन को जब 'शमीम'
बर्फ़ के सूरज पिघल जाते हैं क्यूं
- फ़ारूक़ शमीम

मयस्सर फिर न होगा चिलचिलाती धूप में चलना
यहीं के हो रहोगे साए में इक पल अगर बैठे
- शहज़ाद अहमद


बैठा ही रहा सुब्ह से में धूप ढले तक
साया ही समझती रही दीवार मुझे भी
- शहज़ाद अहमद

दोपहर की धूप में मेरे बुलाने के लिए
वो तिरा कोठे पे नंगे पाँव आना याद है
- हसरत मोहानी


धूप ही धूप थी इस के मुख पर
रूप ही रूप हवा में उतरा
- नासिर शहज़ाद

तमाम लोग इसी हसरत में धूप धूप जले
कभी तो साया घनेरे शजर से निकलेगा
- फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी


धूप या'नी कि ज़र्द ज़र्द इक धूप
लाल क़िले से ढल गई होगी
- जौन एलिया