Showing posts with label सन्नाटा. Show all posts
Showing posts with label सन्नाटा. Show all posts

Saturday, May 16, 2020

वीराना शायरी

हर सम्त है वीरानी सी वीरानी का आलम
अब घर सा नज़र आने लगा है मिरा घर भी
- बिस्मिल आग़ाई


कोई वीरानी सी वीरानी है
दश्त को देख के घर याद आया
- मिर्ज़ा ग़ालिब



हमें इस तरह ही होना था आबाद
हमारे साथ वीराने लगे हैं
- बकुल देव


बस्ती बस्ती पर्बत पर्बत वहशत की है धूप 'ज़िया'
चारों जानिब वीरानी है दिल का इक वीराना क्या
- अहमद ज़िया



बिछड़ा कुछ इस अदा से कि रुत ही बदल गई
इक शख़्स सारे शहर को वीरान कर गया
- ख़ालिद शरीफ़


इतनी सारी यादों के होते भी जब दिल में
वीरानी होती है तो हैरानी होती है
- अफ़ज़ल ख़ान

न हम वहशत में अपने घर से निकले
न सहरा अपनी वीरानी से निकला
- काशिफ़ हुसैन ग़ाएर


शायद यही जहाँ किसी मजनूँ का घर बने
वीराना भी अगर है तो वीराँ न कीजिए
- हफ़ीज़ जालंधरी

दूर तक कोई भी नहीं दिल में
आख़िरी शहर भी मिला वीरान
- स्वप्निल तिवारी


कितनी वीरानी है मेरे अंदर
किस क़दर तेरी कमी है मुझ में
- नाहीद विर्क