जो बेघर हैं तूफां में, वो महज़ प्यादे हैं |
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Friday, May 22, 2020
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आशु तो कुछ भी नहीं आसूँ के सिवा, जाने क्यों लोग इसे पलकों पे बैठा लेते हैं।