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Saturday, May 2, 2020

बात शायरी

बात से बात की गहराई चली जाती है 
झूट आ जाए तो सच्चाई चली जाती है 
-शकील आज़मी

ये सब कहने की बातें हैं कि ऐसा हो नहीं सकता 
मोहब्बत में जो दिल मिल जाए फिर क्या हो नहीं सकता 
-हफ़ीज़ जौनपुरी

मौत ख़ामोशी है चुप रहने से चुप लग जाएगी 
ज़िंदगी आवाज़ है बातें करो बातें करो 
- अहमद मुश्ताक़

तिरी आवाज़ को इस शहर की लहरें तरसती हैं 
ग़लत नंबर मिलाता हूँ तो पहरों बात होती है 
- ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

बोलते रहना क्यूँकि तुम्हारी बातों से 
लफ़्ज़ों का ये बहता दरिया अच्छा लगता है 
- अज्ञात
देर तक चंद मुख़्तसर बातें 
उस से कीं मैं ने आँख भर बातें 

तू मिरे पास जब नहीं होता 
तुझ से करता हूँ किस क़दर बातें 
-आसिम वास्ती

बात की बात ही इसे कहिए
क़हक़हे दर्द-ओ-ग़म मिटाते हैं
- मुमताज़ राशिद
सब्र पर दिल को तो आमादा किया है लेकिन 
होश उड़ जाते हैं अब भी तिरी आवाज़ के साथ 
- आसी उल्दनी

तुम ने छेड़ा तो कुछ खुले हम भी
बात पर बात याद आती है
- अज़ीज़ लखनवी

 
ये क्या कि बात बात पे बस दिल-लगी की बात
तुम भी तो पेश आओ कभी अपने-पन के साथ
- मुंतज़िर क़ाएमी

थी कभी बात बात में तासीर
अब दुआ में असर नहीं आता
- हफ़ीज़ जौनपुरी

Thursday, April 2, 2020

ज़ज़्बातों की स्याही लफ़्ज़ों में धार मांगती है

मेरी शायरी वक़्त से थोड़ा उधार मांगती है
ज़ज़्बातों की स्याही लफ़्ज़ों में धार मांगती है