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Wednesday, October 9, 2019

भीतर के रावण को जो, आग खुद लगायेंगे

भीतर के रावण को जो, आग खुद लगायेंगे,
सही मायने में वे ही, दशहरा मनाएंगे!

Tuesday, October 8, 2019

दशहरा पर करें, हम इसका संहार॥

क्रोध, कपट, कटुता, कलह, चुगली, अत्याचार,
दगा, द्वेष, अन्याय, छल, रावण का परिवार॥

राम चिरंतन चेतना, राम सनातन सत्य।
रावण वैर-विकार है, रावण है दुष्कृत्य॥

वर्तमान का दशानन, यानी भ्रष्टाचार।
दशहरा पर करें, हम इसका संहार॥

रावण बनना भी कहाँ आसान?

रावण बनना भी कहाँ आसान?

रावण में अहंकार था,
तो पश्चाताप भी था,
रावण में वासना थी,
तो संयम भी था!

रावण में सीता के अपहरण की ताकत थी,
तो बिना सहमति परस्त्री को,
स्पर्श भी न करने का संकल्प भी था!

सीता जीवित मिली,
ये राम की ही ताकत थी,
पर पवित्र मिली,
ये रावण की भी मर्यादा थी!

राम,
तुम्हारे युग का रावण अच्छा था,
दस के दस चेहरे, सब “बाहर” रखता था!

महसूस किया है कभी,
उस जलते हुए रावण का दुःख,
जो सामने खड़ी भीड़ से,
बारबार पूछ रहा था?

“तुम में से कोई राम है क्या?”

कौन है वो जो इसे फिर से जनम देता है..?

”राम होने में या रावण में है अंतर इतना,
एक दुनिया को खुशी दूसरा गम देता है !
हम ने रावण को बरस दर बरस जलाया है,
कौन है वो जो इसे फिर से जनम देता है..?