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Thursday, June 11, 2020

किनारा शायरी

भंवर से लड़ो तुंद लहरों से उलझो
कहां तक चलोगे किनारे किनारे
- रज़ा हमदानी


ज़रा दरिया की तह तक तो पहुँच जाने की हिम्मत कर
तो फिर ऐ डूबने वाले किनारा ही किनारा है
- बासित भोपाली


पाँव उठते हैं किसी मौज की जानिब लेकिन
रोक लेता है किनारा कि ठहर पानी है
- अकरम महमूद


तलातुम का एहसान क्यूँ हम उठाएँ
हमें डूबने को किनारा बहुत है
- साहिर भोपाली


मिरे डूब जाने का बाइस न पूछो
किनारे से टकरा गया था सफ़ीना
- हफ़ीज़ जालंधरी


इन किनारों की ज़िंदगी देखो
साथ रहते हैं मिल नहीं सकते
- निकहत गुल-रुख़

मिरे नाख़ुदा न घबरा ये नज़र है अपनी अपनी
तिरे सामने है तूफ़ाँ मिरे सामने किनारा
- फ़ारूक़ बाँसपारी


दिल के दरिया ने किनारों से मोहब्बत कर ली
तेज़ बहता है मगर कम नहीं होने पाता
- सरवत ज़ेहरा

दोस्त अहबाब से लेने न सहारे जाना
दिल जो घबराए समुंदर के किनारे जाना
- अब्दुल अहद साज़


रब्त है हुस्न ओ इश्क़ में बाहम
एक दरिया के दो किनारे हैं
- मोहम्मद दीन तासीर