आशु तो कुछ भी नहीं आसूँ के सिवा, जाने क्यों लोग इसे पलकों पे बैठा लेते हैं।
हम ने पाला मुद्दतों पहलू में, हम कुछ भी नहीं
तुम ने देखा एक नज़र और दिल तम्हारा हो गया
आसी राम नगरी
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