आशु तो कुछ भी नहीं आसूँ के सिवा, जाने क्यों लोग इसे पलकों पे बैठा लेते हैं।
गहरे समंदरों की भला क्या खबर उन्हें..
आंखों की झील में जो उतरे नहीं कभी ।।
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