आशु तो कुछ भी नहीं आसूँ के सिवा, जाने क्यों लोग इसे पलकों पे बैठा लेते हैं।
दाग़ देहलवी
इस नहीं का कोई इलाज नहीं
रोज़ कहते हैं आप आज नहीं
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